अब कहीं दूर से सुनाई पड़ती हैं,
जो यादें मुझे कभी दिखाई देती थीं,
अब वो किसी धुएं में छिप जाती हैं,
उन यादों के कई पल गुजर जाते हैं,
कुछ पल मुझे आईना दिखा जाती हैं,
मगर उनमें कोई चेहरा न दिखाती हैं,
फिर वो यादें किसी बंद तिज़ोरी में मिल जाती हैं,
वो हँसती मेरी यादें मुझे कही दूर सुनाई देती हैं।।
चांदनी
सुराग़, उत्तराखंड
गांव की आवाज

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